MSP क्या है? MSP ka Full form in Hindi

MSP ka Full form: हाल ही में भारत में जो माहौल चल रहा है उसमें आपको एक शब्द बार-बार सुनाई देता है MSP. यह एमएसपी क्या है? अगर आप भी जानना चाहते हैं कि एमएसपी क्या है और MSP ka full form क्या है? तो यह आर्टिकल आपके लिए काफी उपयोगी है. आज हम इसके बारे में पूरे विस्तार से बताएंगे.

MSP क्या है? MSP ka Full form in Hindi

किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु सरकार हर साल नई नई योजनाएं शुरू करती है. केंद्र सरकार का लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दुगनी करना है.

MSP क्या है? Minimum Support Price

सरकार ने किसानों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिले इसलिए एमएसपी योजना शुरू कर रखी है. MSP का फुल फॉर्म Minimum Support Price होता है. जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य भी कहा जाता है. इससे किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा.

MSP सरकार की तरफ से घोषित कृषि उत्पादों का मूल्य होता है. मान लीजिए अगर किसी कृषि उत्पादक का एमएसपी ₹1000 प्रति क्विंटल है तो यह माना जाता है कि किसान को उस उत्पादक के लिए न्यूनतम इतना मूल्य तो मिलना ही चाहिए.

यह एक प्रकार का गारंटीड मूल्य है जो किसानों को उनकी फसल पर उपलब्ध करवाया जाता है.

MSP ka Full form in Hindi

MSP का फुल फॉर्म “minimum support price” होता है जिसको हिंदी में “न्यूनतम समर्थन मूल्य” कहा जाता है. इसके द्वारा सरकार द्वारा प्रतिवर्ष अनाज के मूल्य बढ़ाने का नियम रखा गया है. बाजारों में फसलों की कीमत पर कम या ज्यादा होने का प्रभाव किसानों पर ना पड़े इसीलिए सरकार द्वारा किसानों की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित की जाती है.

MSP कौन तय करता है?

एमएसपी तय करने के लिए CACP नाम की संस्था काम करती है. जिस का फुल फॉर्म Commission for Agricultural Cost and Prices है. जिसे हिंदी में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कहते हैं. ये संस्था देश के कृषि मंत्रालय के तहत आती है. ये संस्था जनवरी 1965 में बनाई गई थी और तब इसका नाम कृषि मूल्य आयोग था. 1985 में इसमें लागत भी जोड़ दी गई और नाम हो गया कृषि लागत एवं मूल्य आयोग. ये संस्था कृषि मंत्रालय, आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति और भारत सरकार को अपने आंकड़े बताती है. इन तीनों जगहों से इज़ाज़त मिलने के बाद अलग-अलग फसलों का MSP तय होता है.

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Minimum Support Price कैसे तय की जाती है?

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कुछ मानकों पर आंकड़े इकट्ठा करता है. जो निम्न प्रकार है:

  • देश के अलग-अलग इलाकों में किसी खास फसल की प्रति हेक्टेयर लागत
  • खेती के दौरान होने वाला खर्च और आने वाले अगले एक साल में होने वाला बदलाव
  • देश के अलग-अलग क्षेत्र में प्रति क्विंटल अनाज को उगाने की लागत
  • प्रति क्विंटल अनाज उगाने के दौरान होने वाला खर्च और आने वाले अगले एक साल में होने वाला बदलाव
  • अनाज की प्रति क्विंटल बाजार में कीमत और आगे एक साल में होने वाला औसत बदलाव
  • किसान जो अनाज बेचता है उसकी कीमत और जो चीजें खरीदता है उसकी कीमत
  • सरकारी और सार्वजनिक एजेंसियों जैसे एफसीआई और नफेड की स्टोरेज क्षमता
  • एक परिवार पर खपत होने वाला अनाज और एक व्यक्ति पर खपत होने वाले अनाज की मात्रा
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में उस अनाज की कीमत, आने वाले साल में कीमत में होने वाला बदलाव
  • विश्व के बाजार में उस अनाज की मांग और उसकी उपलब्धता
  • अनाज के भंडारण, उसको एक जगह से दूसरी जगह पर लाने ले जाने का खर्च, लगने वाला टैक्स, बाजार की मंडियों का टैक्स और अन्य फायदा.

कौनसी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाता है?

फिलहाल सरकार की ओर से कुल 23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाता है. जो निम्न प्रकार है:

  • 7 अनाज: धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ, जई, रागी
  • 5 दालें: चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर
  • 7 तिलहन: मूंगफली, सरसो, सोयाबीन, शीशम, सूरजमुखी, कुसुम, नाइजर सीड
  • 4 व्यापारिक फसल: गरी, गन्ना, कपास, जूट 

एमएसपी (MSP) के लाभ

  • एमएसपी की वजह से किसानों की आय में वृद्धि होती है.
  • यदि बाजारों में किसानों की फसलों का दाम गिर जाता है फिर भी किसानों को निर्धारित एमएसपी दी जाती है.
  • किसानों को अपनी फसलों का सही दाम मिलता है.
  • सरकार द्वारा उन्हें तय की गई एमएसपी समय पर प्राप्त होती है.

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